Wednesday, 31 August 2017

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Thursday, December 14, 2017

किशोरी हो गई बिटिया – hindi kahani- अन्तरा करवड़ेThalua Club / 3 वर्ष पहले

जानती हूँ शोना! अब तुम अपनी गुड़िया को देख थोड़ी परेशान हो जाती हो । तुम्हारे बचपन की वो तस्वीर जिसमें तुम्हारे पहले पहले टूटे दांत की प्यारी सी मुस्कान है¸ उसे अब तुमने तकिये के नीचे दबा दिया है। तुम्हारी पलकें लंबी और रेशमी होकर सपनों के शहर में पहुंचने लगी है। और हाँ ! तुम्हें अब “शोना बेटा” कहना भी उलझन में डाल देता है ।

ये सब कुछ मुझे तो तुम्हारे लिए बड़ा स्वाभाविक लग रहा है लेकिन क्या तुम ये जानती हो कि अब तुम अपने जीवन के नए अध्याय को पढ़ने जा रही हो । कई बार तुम्हें माँ¸ पिताजी और ये सारी दुनिया ही क्यों न कहूँ¸ दुश्मन सी प्रतीत होगी । कोई तुम्हारे मन को पढ़ ले या तुम्हारे दिन में देखे जा रहे सपनों में दखल दे इसे तुम कभी पसंद नहीं करोगी । और हो भी क्यों नहीं अब तुम बच्ची थोड़े ही रह गई हो जो फ्रॉक का हुक लगवाने मेरे पास आओगी ।

पता है¸ आज मैंने दुआ माँगी है¸ तुम्हारे लिए¸ कि तुम इस खुले आसमान में अपनी कल्पनाओं के सतरंगे पंख लेकर अनंतकाल तक इस सपनीले प्रदेश में विचरण करो । मैं तुम्हारी भावनाओं की ढाल बनने का प्रयत्न करूंगी जिससे कोई भी तुम्हारे पक्के होते मन की मिट्टी पर वक्त से पहले किसी भी अनचाही याद की छाप न छोड़ सके ।

तुम स्वतंत्र हो बिटिया¸ अपने संसार में । तुम मुक्त हो अपने निर्णय लेने के लिए । मुझे विश्वास है अपने पालन पोषण पर और तुम्हारे व्यक्तित्व पर कि तुम कभी भी अपने आप को और अपने परिवार को कष्ट में नहीं डालोगी ।

अब तुम फूलों को देखकर नई कल्पनाएं करो बेटी । पढ़ाई में से कुछ समय बचाकर अपने आप से भी बातें किया करो । अपने बचपन के किसी वस्त्र को देखकर विस्मित होकर मुझसे पूछो कि मम्मी क्या मैं कभी इतनी छोटी भी थी।

और हाँ! कभी कभी ही सही लेकिन तुम्हारा सिर अपनी गोद में लेकर सहलाना मुझे ताउम्र अच्छा लगेगा चाहे कल तुम मेरी उम्र की ही क्यों न हो जाओ ।

तुम्हें कुछ और भी कहना था । अपने दोस्तों और सहेलियों की पहचान कैसे करना चाहिये यह अब तुम्हें सिखाने की आवश्यकता नहीं है लेकिन भावनाएँ तुमसे है तुम भावनाओं से नहीं इस अंतर को कभी मत भूलना।

तुम्हारे लिए मैंने अपने कैशोर्य के कुछ लम्हें चुराकर रखे थे। लेकिन अब वे वक्त का जंग खाकर पुराने पड़ चुके है।

और वैसे भी तुम्हें विरासत में सारा संसार मिला है। तुम उन्मुक्त हो परंतु इसे उन्माद से पहले रोकना जानती हो। तुम स्वतंत्र हो और उच्छृंखलता का अर्थ बड़ी अच्छी तरह से समझती हो । तुम सुन्दर हो और जीवन की क्षणभंगुरता से भी परिचित हो ।

कितनी अजीब सी बात है ना बिटिया¸ मैं तो तुम्हें तुम्हारे किशोर जीवन की शुरूआत पर कुछ समझाईश देने का विचार रखती थी लेकिन तुम अब बड़ी हो गई हो बिटिया । खुशहाल बचपन की यादों के साथ एक स्वप्निल कैशोर्य तुम्हारी बाट जोह रहा है ।

अब सोचो नहीं । बस भर लो एक ऊंची उड़ान ¸ भविष्य के लिए ।

तुम्हारी माँ !

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